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वासुकीमुखी नागिनी मंत्र : नागिनी को सिद्ध करने की और प्रसन्न...
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साधक, अनुष्ठान, जप के बाद भी नियमित मंत्र जप करते रहें।
अपने गुरु एवं परमात्मा पर पूर्ण विश्वास और श्रद्धा रखें।
जप के समय क्रोध, लड़ाई, चिंता आदि से बचें।
साधना में बताए गये अनुष्ठान के दिनों तक बिना आलस्य के प्रतिदिन जप अवश्य करें।
पतने पानी करे। गुआ करे। याने करे। सुते करे।
दोनो वीच बैठे शिवजी महात्मा, खोल घड़ा दे दडा
साधना आरम्भ से पूर्व मंत्र को कण्ठस्थ करके'जप करें।
गुरु के सिवा किसी भी अन्य व्यक्ति से साधना सम्बन्धी कोई बात न करें।
इसी तरह लगातार जप का अभ्यास करते रहने से आपके चित्त में वह मंत्र इस कदर जम जाता है कि फिर नींद में भी वह चलता रहता है और अंतत: एक दिन वह मंत्र सिद्ध हो जाता है। दरअसल, मन जब मंत्र के अधीन हो जाता है तब वह सिद्ध होने लगता है। अब सवाल यह उठता है कि सिद्ध होने के बाद क्या होता है here या कि उसका क्या लाभ? आओ अगले पन्नों पर इसे जानते हैं।
उदाहरणार्थ यदि आपके मन में एक साथ एक हजार विचार चल रहे हैं तो उन सभी को समाप्त करके मात्र एक विचार को ही स्थापित करना ही मंत्र का लक्ष्य होता है। यह लक्ष्य प्राप्त करने के बाद आपका दिमाग एक आयामी और सही दिशा में गति करने वाला होगा।
साधना शान्त, नियत स्थान पर एकांत में ही करें।
साधना के समय एकांत में रहें और अन्य गतिविधियों से बचें।